जयपुर में हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने नए आपराधिक कानूनों की प्रदर्शनी कार्यक्रम में कहा था कि “अब कानून का फोकस दंड पर नहीं, न्याय पर रहेगा.” लेकिन लगता है कि यह भावना कानून लागू करने वाले अफसरों तक नहीं पहुंची. भीलवाड़ा में एक पेट्रोल पम्प पर घटी घटना ने इस बात पर फिर सवाल खड़ा किया है. बताया जा रहा है कि एक गाड़ी पेट्रोल भरवाने आई, कर्मचारी दूसरी गाड़ी में पेट्रोल भरने लगा. इसी दौरान एक व्यक्ति उतरकर खुद को एसडीएम बताते हुए नाराज़ हुआ कि जब उसकी गाड़ी खड़ी है तो दूसरी में पेट्रोल कैसे भरा जा सकता है. कर्मचारी कुछ समझ पाता इससे पहले एसडीएम साहब ने उसे थप्पड़ जड़ दिया, जो सीसीटीवी में साफ दिखाई दे रहा है.
नए कानूनों में छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान है, लेकिन ‘थप्पड़ की सजा’ शायद एसडीएम साहब का नया नवाचार है. घटना के बाद पुलिस ने भी तत्परता दिखाई – लेकिन कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि थप्पड़ मारने वाले अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो एक नया मोड़ आया. एसडीएम की पत्नी के नाम से एक पत्र सामने आया, जिसमें पेट्रोल पंप कर्मचारियों पर अश्लील हरकतें करने के आरोप लगाए गए. यह आरोप अब कर्मचारियों को खुद साबित करना होगा कि वे निर्दोष हैं.

कानूनी जानकारों का कहना है कि बिना जांच, बिना प्रमाण, इतनी जल्दी गिरफ्तारी होना कानून के नए मूल्यों के विरुद्ध है. घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या कानून और अधिकार केवल सत्ता वालों के लिए हैं, या आम नागरिक को भी न्याय की समान गारंटी है ? इस पूरे प्रकरण ने न केवल एसडीएम की कार्यप्रणाली, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है. यह घटना साबित करती है कि जब कानून की समझ सत्ता के साथ घुल जाती है, तो न्याय कहीं पीछे छूट जाता है.


