दीपावली की रोशनी में डूबा नागौर उस वक्त अंधेरे में चला गया, जब एक पुलिस कांस्टेबल की 14 साल की बेटी मनीषा की इलाज के दौरान मौत हो गई. बीकानेर की आठवीं कक्षा की छात्रा मनीषा छुट्टियां मनाने दादी के घर आई थी, लेकिन गलत इंजेक्शन ने उसकी ज़िंदगी छीन ली. परिवार का आरोप है कि डॉक्टर रामलाल खोझा ने इंजेक्शन लगाया और हालत बिगड़ते ही क्लिनिक बंद कर फरार हो गया. मनीषा को नागौर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पांच दिन बाद प्रशासन ने दफनाया गया शव निकलवाकर पोस्टमार्टम का आदेश दिया. फिलहाल आरोपी डॉक्टर फरार है और जांच जारी है. यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है. जहां ज़िंदगी और लापरवाही के बीच की रेखा धुंधली पड़ चुकी है. सवाल यह है – क्या इस बार भी सच्चाई फाइलों में दफन हो जाएगी, या किसी को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा ?
