बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी ने सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के शिशु रोग विभाग के सहयोग से FOCUS – बुखार, निरीक्षण, नैदानिक संकेत, समझ और रणनीति मॉड्यूल का सफल आयोजन किया. यह कार्यक्रम भारतीय बाल रोग अकादमी के अध्यक्षीय कार्य योजना 2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन के नेतृत्व में संपन्न हुआ. पीबीएम के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जी. एस. तंवर ने जनवरी 2026 में कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन से इस बुखार मॉड्यूल का प्रशिक्षण प्राप्त किया था. उन्होंने बताया कि बच्चों में बुखार सबसे सामान्य लक्षण है, लेकिन वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद अनावश्यक जांच और एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग अभी भी आम है.
डॉ. तंवर ने स्पष्ट किया कि हर बुखार में जांच या एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती. उपचार का आधार वैज्ञानिक सोच, जोखिम वर्गीकरण और नैदानिक तर्क होना चाहिए. इससे एंटीबायोटिक प्रतिरोध, आर्थिक बोझ और अभिभावकों की चिंता को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मॉड्यूल में बुखार प्रबंधन के लिए तीन-क्षेत्र पद्धति पर विशेष जोर दिया गया. हरा क्षेत्र में स्वस्थ दिखने वाले बच्चे के लिए न्यूनतम या कोई जांच नहीं की जाती और परामर्श आधारित उपचार दिया जाता है. पीला क्षेत्र में सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के साथ चयनित जांच की जाती है. लाल क्षेत्र में आपात स्थिति होती है, जहां त्वरित उपचार और भर्ती की आवश्यकता पड़ती है. डॉ. तंवर ने कहा कि यह सार्वभौमिक पद्धति अभिभावकों के बुखार भय को कम करती है और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा को बढ़ावा देती है.
कार्यक्रम में डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल ने जोखिम वर्गीकरण एवं श्रेणीकरण की विस्तृत व्याख्या की. जयपुर से डॉ. किशोर अग्रवाल और दिल्ली से डॉ. नेहा रस्तोगी ने विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार केस चर्चा की. डॉ. पी. सी. खत्री ने समय के साथ बुखार के क्षेत्र परिवर्तन की अवधारणा पर प्रकाश डाला. डॉ. गौरव अग्रवाल ने प्रोबायोटिक्स की भूमिका पर व्याख्यान दिया, जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों को शीतला अष्टमी जैसी सामाजिक परंपराओं से जोड़ा गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. रेनू अग्रवाल द्वारा किया गया. इस अवसर पर डॉ. सी. के. चाहर, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. विजय चलाना, डॉ. ओ. पी. चाहर, डॉ. जेठाराम विश्वकर्मा, डॉ. कुलदीप सिंह बिठू, डॉ. अनिल लाहोटी, डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ. सारिका स्वामी, डॉ. पवन डारा, डॉ. एल. सी. बैद, डॉ. धीरज शर्मा, डॉ. अनिल दूसा, डॉ. गौरव पारीक, डॉ. संतोष चाँडक तथा डॉ. हरि किशन सुथार सहित कुल 60 से अधिक वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता निभाई.
इस बुखार मॉड्यूल के मुख्य समन्वयक डॉ. अनुभव चौधरी रहे, जिन्होंने कार्यक्रम का सुचारु संचालन किया. डॉ. जी. एस. तंवर और डॉ. नेहा रस्तोगी द्वारा आयोजित क्विज़ एवं इंटरएक्टिव सत्रों से रेजिडेंट डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों को तर्कसंगत बुखार प्रबंधन के प्रति संवेदनशील बनाया गया. अंतिम संदेश में जोर दिया गया कि बुखार का उपचार भय से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच से करें. दवा से पहले निरीक्षण, जांच से पहले नैदानिक तर्क और एंटीबायोटिक से पहले साक्ष्य जरूरी है. FOCUS मॉड्यूल का उद्देश्य बुखार प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक से तर्कसंगत बनाना है, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें, अभिभावक आश्वस्त हों और चिकित्सा वैज्ञानिक दिशा में आगे बढ़े.
