नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देकर देश की राजनीति में बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया है. प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें गहराई से व्यथित किया.
उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी तरह के भ्रम या राजनीतिक विवाद का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता. उन्होंने छात्रों से पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की. त्यागपत्र में उन्होंने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि सरकार ने शिकायतें मिलते ही सीबीआई जांच के आदेश दिए, परीक्षा रद्द की और 21 जून को दोबारा सफलतापूर्वक परीक्षा आयोजित कराई. 16 जुलाई को घोषित परिणामों में बड़ी संख्या में मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों से उन्हें सबसे अधिक पीड़ा हुई. उन्होंने कहा कि चार दशकों से शिक्षा और छात्र हितों के लिए काम करते हुए उनका हमेशा यही प्रयास रहा कि देश में पारदर्शी, मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था विकसित हो. प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार जताते हुए कहा कि वे आगे भी राष्ट्र सेवा और देश के युवाओं के हित में पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार जल्द ही नए शिक्षा मंत्री के नाम पर फैसला कर सकती है. NEET विवाद के बीच आया यह इस्तीफा राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा जगत में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.



