पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश पार्टी प्रधान बनाए रखने के फैसले के बाद कई वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी सामने आई है. इधर, पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के बाद दिल्ली में कद्दावर कांग्रेस नेता, गुरदासपुर सांसद और राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी. बड़ी राजनीतिक हलचल के बाद कई तरह की सियासी बयानबाजी भी सामने आने लगी तो सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अफवाहों वाली खबरों का खंडन करते हुए X पर लिखा कि मेरी गृह मंत्री के बीच हुई बैठक को कुछ मीडिया क्षेत्रों द्वारा दिए जा रहे मनगढ़ंत राजनीतिक गलत मायनों का खंडन करता हूं. मैंने 4 जून को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था और उसकी एक कॉपी गृह मंत्री को भी भेजी थी जिसमें पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती जिलों की स्थिति का ज़िक्र किया था.
उन्होंने कहा – मैंने बिगड़ती कानून-व्यवस्था, पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टरों और राजनेताओं के बीच सांठ-गांठ और पंजाब पुलिस के राजनीतिक इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया था. उसी पत्र के संदर्भ में मुझे आज बुलाया गया था. उन्होंने कहा कि यह बैठक पहले से तय थी और पंजाब में बिगड़ते कानून-व्यवस्था की स्थिति पर मेरी बात हुई. इसके बाद रंधावा ने मुलाक़ात को लेकर मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चर्चा करना था. कांग्रेस पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, वह उसी का निर्वहन कर रहे हैं और उनकी मुलाकात को किसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. बताते चलें कि रंधावा भी एक समय सीएम पद की रेस में शामिल थे लेकिन उस समय आलाकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब सूबे का मुख्यमंत्री बनाया था.

