बीकानेर जिले के देशनोक थाना क्षेत्र में करीब सात साल पुराने नाबालिग छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष पोक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया. कोर्ट में न्यायाधीश मनीषा चौधरी ने दो आरोपियों अजयदान और कालूदान को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि बालिकाओं के साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी बरतना समाज और न्याय व्यवस्था, दोनों के हित में नहीं होगा. कोर्ट ने मुख्य आरोपी अजयदान को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया. वहीं कालूदान को भी शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास तथा 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पीड़िता की उम्र, मेडिकल और डीएनए रिपोर्ट सहित जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को झूठा फंसाने की दलील दी. वहीं अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की गवाही, स्कूल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित किए. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा.
कोर्ट ने आरोपियों से वसूले जाने वाले 1.75 लाख रुपये जुर्माने की राशि पीड़िता को देने के आदेश दिए. इसके अलावा राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत चार लाख रुपये देने का आदेश दिया. राज्य और परिवादीया की ओर से पैरवी क्रमशः विशिष्ठ लोक अभियोजक शिवचंद भोजक और अधिवक्ता रविकांत वर्मा, पंकज परिहार, मानवेंद्र सिंह व रामनिवास आचार्य ने की.
बता दें कि, 22 अगस्त 2019 को देशनोक थाना क्षेत्र की 16 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता अपने पिता को टिफिन देकर घर लौट रही थी. इसी दौरान दोनों आरोपियों ने उसका अपहरण कर उसे एक सुनसान मकान में ले गए. वहां आरोपी अजयदान ने उसके साथ दुष्कर्म किया, जबकि कालूदान ने वारदात में सहयोग किया और वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी दी. अगले दिन पीड़िता ने पूरी घटना अपनी मां को बताई, जिसके बाद देशनोक थाने में मामला दर्ज हुआ.
