राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राजस्थान के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम के निर्देशों पर बीकानेर पीसीपीएनडीटी टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए हरियाणा के डबवाली में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के खिलाफ सफल डिकॉय ऑपरेशन को अंजाम दिया. करीब छह माह की लगातार रैकी और गोपनीय निगरानी के बाद टीम ने गिरोह से जुड़े एक शातिर दलाल को गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य दलाल की तलाश जारी है. मुख्य आरोपी पूर्व में भी पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है.

मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि गिरोह की गतिविधियों पर पिछले छह माह से लगातार निगरानी रखी जा रही थी. बीकानेर और श्रीगंगानगर की टीम ने दो बार कार्रवाई का प्रयास किया, लेकिन आरोपी अपनी चालाकी के कारण बच निकला. तीसरे प्रयास में संयुक्त निदेशक बीकानेर जोन डॉ. देवेंद्र चौधरी के नेतृत्व में सीएमएचओ बीकानेर डॉ.पुखराज साध, पीसीपीएनडीटी समन्वयक बीकानेर महेंद्र सिंह चारण व टीम द्वारा बनाई गई सुनियोजित रणनीति सफल रही. डिकॉय गर्भवती महिला के माध्यम से दलाल से संपर्क किया गया, जिसने भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए 36,500 रुपये मांगे. इसके बाद महिला को हरियाणा के डबवाली स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां पूरी कार्रवाई पर टीम की पैनी नजर बनी रही और दलाल को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया.

बिना जांच फर्जी रिपोर्ट का अवैध धंधा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी भ्रूण लिंग जांच के नाम पर लोगों को गुमराह करता था. अधिकांश मामलों में गर्भ में बेटी होने की झूठी जानकारी देकर गर्भपात के लिए प्रेरित किया जाता था. विभाग को आशंका है कि इस अवैध कारोबार के कारण अब तक सैकड़ों अजन्मे बच्चों की जान गई हो सकती है. मामले में अस्पताल और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है. इस कार्रवाई में बीकानेर टीम के साथ पीसीपीएनडीटी कोऑर्डिनेटर नंदलाल पुनिया, रणदीप सिंह, सीओ-आईईसी विनोद बिश्नोई सहित बीकानेर, श्रीगंगानगर, सीकर एवं राज्य पीसीपीएनडीटी सेल के अधिकारियों और कार्मिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
बीकानेर पीसीपीएनडीटी प्रभारी महेंद्र सिंह चारण की रही अहम भूमिका
पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में बीकानेर जिला पीसीपीएनडीटी प्रभारी महेंद्र सिंह चारण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही. उन्होंने करीब छह माह तक लगातार रैकी, मुखबिर तंत्र विकसित करने, गोपनीय सूचनाएं जुटाने और गिरोह की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने का कार्य किया. डिकॉय ऑपरेशन की रणनीति तैयार करने से लेकर विभिन्न जिलों की टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने तक उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई. उनकी सटीक योजना और निरंतर प्रयासों के चलते लंबे समय से सक्रिय गिरोह तक टीम पहुंच सकी और यह बड़ी कार्रवाई संभव हो सकी.
दो बार चकमा देकर बच निकला था आरोपी
मुख्य आरोपी राजेश इतना शातिर था कि कार्रवाई से पहले गर्भवती महिला और उसके परिजनों का पूरा सत्यापन करता था. वह स्वयं क्षेत्र में पूछताछ कराने के साथ कभी आमने-सामने नहीं मिलता था और केवल फोन पर ही संपर्क रखता था. इस बार भी उसने नकद राशि लेने से इनकार कर ऑनलाइन भुगतान कराया, ताकि रंगे हाथों पकड़े जाने से बच सके. हालांकि तीसरे प्रयास में बीकानेर टीम की रणनीति के आगे उसकी सारी चालाकी विफल रही और धरा गया.

