बीकानेर शहर के उदासर में गुरु पूर्णिमा के पावन दिवस पर बाल योगी स्वामी विजयानन्द योगी द्वारा रचित पुस्तक ‘‘विजय वाणी प्रकाश भाग-1,2,3 का आज लोकापर्ण हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ गुरू पूर्णिमा के अवसर पर भजनों के साथ शुरू हुआ. इसके पश्चात विजयानन्द योगी का सम्मान डॉ. सुशील मोयल, संजय जनागल, नन्द किशोर बारूपाल द्वारा किया गया.
कार्यक्रम में विजयानन्द योगी ने बताया कि यह पुस्तक समाज में व्याप्त हो रही व्यसनों को दूर के लिए लिखी है. विजयानन्द योगी ने बताया कि इस सांसारिक मोह माया से विरक्त होकर किस प्रकार जीवन को सफलता की ओर ले जा सकते है. पुस्तक में दोहों के साथ उनको सरलीकरण में समझाया गया है. विजयनानन्द योगी ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि पूर्व पुण्यों से मानव तन व सद्गुरू मिला. सद्गुरू परमात्मा की असीम कृपा से मोह, माया, गृहबन्धन से छुटकारा और सद्गुरू चरण शरण में रहने का शुभ अवसर तथा गुरू सेवा, भक्ति आत्म ज्ञान मिला, आत्म ज्ञान से अभय पद प्राप्त करके मैं परम सुखी हुआ हूं.
डॉ. सुशील मोयल ने संबोधन में कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं. उन्होंने कहा कि जीवन के रंग, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक मूल्यों तथा जीवन के विविध अनुभवों का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है. संजय जनागल ने कहा कि पुस्तक की भाषा-शैली, विचारों की गहराई तथा साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगी.
समारोह में साहित्य, शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, पुस्तक-प्रेमी तथा शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे. पूरे सभागार को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण दिखाई दे रहा था. पुस्तक की भाषा सरल, प्रभावशाली और सहज है, जिससे हर आयु वर्ग का पाठक आसानी से जुड़ सकता है. उन्होंने कहा कि पुस्तक में सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संबंधों तथा मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है.
इस कार्यक्रम में दुलीचंद बलायच, चुन्नीलाल हाटीला, गौरीशंकर जनागल, दाना राम गोयल, रतनलाल, रामचन्द्र गोयल, नारायण, गणेश, भंवर तंवर, आदि की गरिमामय उपस्थिति रही. झझू, कोलायत, सुजानगढ़, बीदासर, उदासर, उदयरामसर आदि जगहों से लोग आए.
