चार लाइन न्यूज़ डेस्क (तीर्थराज बरसलपुर) – बीकानेर में नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में मंथन का दौर जारी है। इसी बीच भाजपा की ओर से वाल्मीकि समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने के बाद अब सियासी निगाहें कांग्रेस के टिकट वितरण पर टिक गई हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस भी वाल्मीकि समाज को साधने के लिए चुनावी मैदान में समाज के दावेदारों को टिकट देगी?
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में प्रत्याशी चयन को लेकर दोनों प्रमुख दलों में जोरदार कवायद चल रही है। कांग्रेस में टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं और पार्टी स्तर पर नामों को लेकर लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है।
वाल्मीकि समाज की बात करें तो बीकानेर शहर में समाज के वोटर्स की संख्या महत्वपूर्ण मानी जाती है। शहर के कई वार्डों में वाल्मीकि समाज का वोट चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में भाजपा द्वारा समाज को टिकट दिए जाने के बाद कांग्रेस के सामने भी सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती खड़ी हो गई है।
अब नजर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की अध्यक्षता में जयपुर में होने वाली कांग्रेस की फाइनल बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में बीकानेर नगर निगम सहित अन्य निकायों के प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम स्तर पर चर्चा होगी। पार्टी स्थानीय समीकरण, दावेदारों की सक्रियता, जीत की संभावनाओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर नाम तय कर सकती है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए इस बार सामाजिक समीकरण खासे अहम हैं। बीकानेर नगर निगम के वार्डों के आरक्षण की तस्वीर पहले ही साफ हो चुकी है। जिले के निकायों में कुल 270 वार्ड हैं, जिनमें 39 वार्ड एससी, 54 ओबीसी और 177 सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
ऐसे में क्या भाजपा के बाद कांग्रेस भी वाल्मीकि समाज को टिकट देकर बड़ा सियासी संदेश देगी? या फिर पार्टी अपने पुराने राजनीतिक समीकरणों और स्थानीय दावेदारों की जीत की संभावनाओं के आधार पर टिकट तय करेगी—इसका जवाब कांग्रेस की फाइनल सूची में सामने आएगा।
फिलहाल टिकटों की घोषणा से पहले बीकानेर की सियासत में सामाजिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और वाल्मीकि समाज को मिलने वाला प्रतिनिधित्व भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनता नजर आ रहा है।

