राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. ब्यूरो के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने पुष्टि करते हुए बताया कि एसीबी कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद यह कार्रवाई की गई. इस मामले में कुल चार आरोपी फरार चल रहे थे, जिनमें अग्रवाल प्रमुख नाम थे.
सूत्रों के अनुसार, अग्रवाल पर जल जीवन मिशन के विभिन्न टेंडरों में ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने का गंभीर आरोप है. आरोप है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 960 करोड़ रुपये तक का भुगतान जारी किया गया, जबकि वास्तविक कार्य अधूरा या संदिग्ध था.
ACB महानिदेशक ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ अधिकारियों को पहले से ही फर्जी सर्टिफिकेट लगाए जाने की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने संबंधित दो फर्मों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. इतना ही नहीं, 50 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडरों में एक अतिरिक्त शर्त जोड़ दी गई, जिससे टेंडरों की गोपनीयता भंग हो गई और गड़बड़ियों का रास्ता साफ हुआ.
ACB की इस कार्रवाई को जल जीवन मिशन घोटाले की अब तक की सबसे बड़ी गिरफ्तारी माना जा रहा है. ब्यूरो अब गिरफ्तार अधिकारी से रिमांड पर कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ करेगा और बाकी फरार आरोपियों की तलाश तेज की जाएगी. मामले में आगे की कार्रवाई और संभावित खुलासों को लेकर पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल तेज है.
