बीकानेर जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे संगठन राजस्थान महिला कल्याण मंडल ने अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया. राजस्थान महिला कल्याण मंडल संस्था द्वारा एक्सेस टू जस्टिस परियोजना के अंतर्गत अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के उद्देश्य से नाल गाँव में जागरूकता रैली निकाली. राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय नाल मे प्रधानाचार्य हरीकिशन मेहरडा के नेतृत्व में रैली का आयोजन किया गया. हिंदू परंपरा में अक्षय तृतीया को विवाह के लिए शुभ तिथि मानने से इस दिन बाल विवाह की आशंका को देखते हुए संस्था गांव-गांव में जागरूकता अभियान चला रही है.
राजस्थान महिला कल्याण मंडल जिला प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर बीकानेर को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है और बीकानेर में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है. संगठन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है. राजस्थान महिला कल्याण मंडल देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है.
बीकानेर जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए राजस्थान महिला कल्याण मंडल के निदेशक राकेश कुमार कौशिक ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता. प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है.
परियोजना के जिला जिला समन्वयक अमित कुमार ने बताया कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है. इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है. इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है. लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं. अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है. यह एक उल्लेखनीय बदलाव है और हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही बीकानेर को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे. जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन 250 से भी ज्यादा सहयोगियों के साथ बाल विवाह की ऊंची दर वाले देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में इस अपराध के खिलाफ अभियान चला रहा है.
