राजस्थान के सबसे चर्चित युवा विधायकों में शुमार रविंद्र सिंह भाटी एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। इस बार मुद्दा कोई आंदोलन या बयान नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में अचानक की गई कटौती है. बाड़मेर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश के बाद प्रदेश की सियासत में गर्मी बढ़ गई है. आदेश के अनुसार, विधायक भाटी को दी गई अतिरिक्त सुरक्षा वापस ले ली गई है और अब उन्हें पहले की तुलना में काफी कम सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.
आदेश में क्या बदलाव हुआ ?
जारी निर्देशों के मुताबिक : पहले भाटी को 1 पीएसओ के अलावा 3 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी दिए गए थे. अब नई व्यवस्था में केवल 1 पीएसओ ही उनके साथ रहेगा. यह बदलाव राज्य सरकार की नई सुरक्षा नीति और समान नियमों के आधार पर किया गया है.
क्यों उठा विवाद ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले इंटेलिजेंस इनपुट में खतरे की बात सामने आई थी, तो सुरक्षा घटाने का फैसला कैसे लिया गया ? इसी फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं कि क्या यह केवल प्रशासनिक निर्णय है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संकेत भी छिपा है. ओरण आंदोलन से जुड़ रहा मामला – राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम को भाटी के हालिया “ओरण बचाओ आंदोलन” से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र में जमीन और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा रुख अपनाया था.
समर्थकों में नाराज़गी, सोशल मीडिया पर आक्रोश – जैसे ही आदेश सामने आया, भाटी के समर्थकों में नाराज़गी देखने को मिली. सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि जब एक जनप्रतिनिधि लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों और बड़े दौरों में सक्रिय रहते हैं, तो उनकी सुरक्षा कम करना कितना उचित है.
प्रशासन का तर्क –
पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष को लेकर नहीं, बल्कि सभी विधायकों पर लागू होने वाली समान सुरक्षा नीति के तहत लिया गया है.
बढ़ता विवाद –
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है. आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाज़ी और सियासी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है.
