बीकानेर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के हालिया बीकानेर दौरे के बाद शहर भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बीकानेर भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा ?
इतने बड़े और महत्वपूर्ण दौरे के दौरान भाजपा संगठन की रीढ़ माने जाने वाले कई मंडल अध्यक्षों की सक्रिय मौजूदगी दिखाई नहीं देना चर्चा का बड़ा कारण बना हुआ है। पार्टी के भीतर दबी जुबान में यह कहा जा रहा है कि दौरे के दौरान केवल गिने-चुने चेहरे ही पूरी तरह हावी रहे, जबकि वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे मूल कार्यकर्ताओं और कई समर्पित पदाधिकारियों को अपेक्षित महत्व नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी इस दौरे में भी खुलकर सामने आई। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठनात्मक मजबूती के बजाय “फोटोबाजी” और व्यक्तिगत समीकरणों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
भाजपा के कुछ वरिष्ठ शुभचिंतकों और पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर भविष्य में संगठनात्मक एकजुटता पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि मंडल स्तर के पदाधिकारियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को दरकिनार करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
हालांकि पार्टी के अधिकृत स्तर पर कोई खुली प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बीकानेर भाजपा के भीतर चल रही सुगबुगाहट अब राजनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बन चुकी है। संगठन के कई कार्यकर्ता यह भी मानते हैं कि भाजपा की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं और यदि उन्हें लगातार हाशिए पर रखा गया तो नाराजगी भविष्य में बड़ा रूप ले सकती है।
