बीकानेर कांग्रेस के नेता राहुल जादुसंगत ने बीकानेर जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि 80 से 85 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन के लिए भीषण गर्मी में सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है. उन्होंने कहा कि इस आयु के अधिकांश बुजुर्ग शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं. कई लोग चलने-फिरने में असमर्थ हैं, वहीं अनेक बुजुर्ग गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे हैं. ऐसे में केवल पेंशन सत्यापन के लिए उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों में बुलाना उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है.
राहुल जादुसंगत ने कहा कि सरकार यदि वास्तव में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुविधा के प्रति संवेदनशील है, तो 80 वर्ष से अधिक आयु के सभी पेंशनधारियों के लिए डोर-स्टेप (घर पर जाकर) सत्यापन की व्यवस्था लागू करनी चाहिए. इससे हजारों बुजुर्गों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी और उन्हें सम्मानजनक सुविधा भी प्राप्त होगी. उन्होंने बताया कि कई बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों के हाथों की उंगलियों एवं अंगूठे के निशान उम्र बढ़ने के कारण स्पष्ट नहीं रहते. ऐसे में बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) सत्यापन बार-बार विफल हो जाता है, जिसके कारण उन्हें कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. यह स्थिति बुजुर्गों के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से अत्यंत कष्टदायक है.
राहुल जादुसंगत ने सुझाव दिया कि जिन वरिष्ठ नागरिकों का बायोमेट्रिक सत्यापन संभव नहीं हो पा रहा है, उनके लिए जीवित प्रमाण पत्र (Life Certificate), चिकित्सा प्रमाण-पत्र अथवा अन्य सरल वैकल्पिक व्यवस्था को मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सके. उन्होंने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से आग्रह किया कि वृद्धावस्था पेंशन सत्यापन की प्रक्रिया को मानवीय, सरल और बुजुर्ग हितैषी बनाया जाए. वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक पेंशन का लाभ मिलना उनका अधिकार है, इसलिए सरकार को शीघ्र प्रभाव से ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए जिससे किसी भी बुजुर्ग को पेंशन सत्यापन के लिए धूप, गर्मी और लंबी कतारों में खड़ा न होना पड़े.
