बीकानेर। जब दिल की धड़कन ही शून्य हो जाए तो जिंदगी की उम्मीद भी खत्म मान ली जाती है, लेकिन बीकानेर में एक चमत्कार हुआ है. 82 वर्षीय बुजुर्ग माताजी की हार्ट रेट जीरो होने के बाद भी उनकी जान बचा ली गई. जानकारी के अनुसार नोखा निवासी बुजुर्ग महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थी, जिससे उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं और गहरा ज़ख्म हो गया. परिजन उन्हें लेकर बीकानेर के कई बड़े हार्ट और ब्रेन विशेषज्ञों के पास गए, लेकिन घर पर ईसीजी नहीं होने से बीमारी की जड़ तक कोई नहीं पहुंच पाया.
चार अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद निराश परिजन आखिरी उम्मीद के साथ वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. स्वामी के पास पहुंचे. डॉ. स्वामी ने तुरंत ईसीजी करवाई. रिपोर्ट में ज्यादा कुछ साफ नहीं था, लेकिन अपने तीन दशक के अनुभव से उन्होंने समझ लिया कि यह कोई मामूली बेहोशी नहीं, बल्कि गंभीर हृदय अवरोध (Complete Heart Block) है.
उन्होंने बिना देर किए मरीज को भर्ती कर आईसीयू में मॉनिटर पर रखा. और उनका अनुभव सच साबित हुआ. दूसरे दिन सुबह माताजी फिर बेहोश हो गईं और मॉनिटर पर दिल की धड़कन शून्य (Zero) हो गई. यह वो पल था जहां एक-एक सेकंड कीमती था. डॉ. स्वामी ने अद्भुत तत्परता दिखाते हुए मात्र 5 मिनट में टेम्पररी पेसमेकर लगाकर माताजी को मौत के मुंह से खींच लिया.
परिजनों ने भावुक होते हुए कहा, “अगर हम डॉ. साहब की बात नहीं मानते तो आज हमारी माताजी हमारे बीच नहीं होती. उन्होंने हमारी माँ को नया जीवन दिया है.” आज माताजी का राजस्थान सरकार की RGHS योजना के तहत परमानेंट पेसमेकर सफलतापूर्वक लगा दिया गया है. माताजी पूरी तरह स्वस्थ हैं. इस सफल इलाज के बाद परिजनों में खुशी की लहर है और पूरे क्षेत्र में डॉ. बी.एल. स्वामी के अनुभव और त्वरित निर्णय की जमकर सराहना हो रही है.

