राजस्थान के नगर निगम चुनाव में बीकानेर कांग्रेस के लिए बड़ी सफलता वाला निगम बनकर सामने आया, जबकि राज्य के कई अन्य बड़े नगर निगमों में भाजपा ने अपना दबदबा कायम किया. 21 सितंबर तक अजमेर, अलवर, उदयपुर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के मेयर चुने जा चुके थे, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद पर जीत दर्ज की. जयपुर, जोधपुर और कोटा में आज हुए मेयर चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज कर अपना महापौर बनाने के साथ बोर्ड बनाया है.
बात करें बीकानेर की तो यहां कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 27 सीटें मिलीं. इसके बाद कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 के अंतर से हराकर मेयर पद हासिल किया. अब बीकानेर के नतीजे भाजपा के भीतर संगठनात्मक स्तर पर मंथन का विषय बन सकते हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर बीकानेर में पार्टी से कहां चूक हुई ? क्या चुनावी रणनीति में कमी रही, टिकट वितरण का असर पड़ा या स्थानीय स्तर के समीकरण पार्टी के पक्ष में नहीं बन पाए ?
बीकानेर में भाजपा ने डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को मेयर प्रत्याशी बनाया था, लेकिन पार्टी मेयर का चुनाव नहीं जीत सकी. हालांकि, अगले ही दिन भाजपा ने पंकज गहलोत को उप महापौर बनाकर निगम में अपनी मौजूदगी मजबूत की. गहलोत ने कांग्रेस की नसीम बानो को 40-38 से हराया. अब भाजपा के सामने बीकानेर के चुनाव परिणाम की समीक्षा में कई मुद्दे रहेंगे – टिकट वितरण से लेकर मेयर प्रत्याशी के चयन, चुनाव प्रबंधन, स्थानीय संगठन की भूमिका और पार्षदों के बीच बेहतर तालमेल तक। चुनाव के दौरान और परिणाम के बाद सामने आए राजनीतिक घटनाक्रमों को भी इस मंथन का हिस्सा माना जा सकता है. ऐसे में बीकानेर भाजपा में आने वाले दिनों में हार के कारणों और संगठनात्मक कमियों की समीक्षा को लेकर चर्चा तेज होने के संकेत हैं.
