हृदय रोगों के उपचार में चिकित्सा विज्ञान ने एक बड़ी छलांग लगाई है. अब संकुचित या रोगग्रस्त एओटिक वाल्व (महाधमनी वाल्व) को बदलने के लिए छाती खोलने की आवश्यकता नहीं है. TAVI (ट्रांस कैथेटर एओटिक वाल्व इम्प्लांटेशन), जिसे TAVR (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) भी कहा जाता है, एक अत्याधुनिक और न्यूनतम आक्रामक (minimally invasive) प्रक्रिया है, जिसने हजारों मरीजों को नया जीवन दिया है.
बीकानेर के सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ, आयुष्मान हार्ट केयर के चेयरमैन एवं TAVI विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. स्वामी ने बताया कि यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जो बढ़ती उम्र, कमजोर स्वास्थ्य या अन्य गंभीर बीमारियों के कारण पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी नहीं करवा सकते. “पहले ऐसे कई मरीजों के पास कोई विकल्प नहीं होता था. आज TAVI के माध्यम से हम उन्हें सुरक्षित रूप से नया वाल्व लगाकर एक सक्रिय और बेहतर जीवन लौटा पा रहे हैं.
क्या है एओर्टिक स्टेनोसिस और क्यों है यह खतरनाक ?
एओटिक वाल्व हृदय का प्रमुख द्वार है, जिसके माध्यम से हृदय पूरे शरीर में शुद्ध रक्त पंप करता है. उम्र बढ़ने के साथ इस वाल्व पर कैल्शियम जमा होने लगता है, जिससे यह कठोर और संकुचित हो जाता है. इस स्थिति को एओटिक स्टेनोसिस कहते हैं. इसमें हृदय को रक्त पंप करने के लिए अत्यधिक जोर लगाना पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे हृदय कमजोर होने लगता है. डॉ. स्वामी ने चेताया कि गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है. लक्षण शुरु होने के बाद यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए समय पर जांच और सही उपचार अत्यंत आवश्यक है.
इन लक्षणों को न करें अनदेखा, चलते या काम करते समय सांस फूलना, सीने में दर्द या जकड़न, अत्यधिक थकान और कमजोरी, चक्कर आना या अचानक बेहोश हो जाना, डॉ. स्वामी ने सलाह दी कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग, विशेषकर जिन्हें हृदय में ‘मर्मर” (murmur) की आवाज बताई गई हो, नियमित रूप से इकोकार्डियोग्राफी (Echo) जांच अवश्य करवाएं.
कैसे की जाती है TAVI प्रक्रिया ?
प्रक्रिया से पहले मटीज की इको, सीटी एंजियोग्राफी और अन्य आवश्यक जांच की जाती है, ताकि वाल्व का सटीक आकार और मार्ग तय किया जा सके. इसके बाद मटीज को हल्की बेहोशी (sedation) या एनेस्थीसिया दिया जाता है. जांघ की धमनी (femoral artery) में एक छोटे से पंचर के माध्यम से पतली, लचीली ट्यूब (के थेटट) डाली जाती है. इसी के थेट र के सहारे सिकुड़ी हुई अवस्था में नया कृत्रिम वाल्व हृदय तक पहुँचाया जाता है.
सही स्थान पर पहुँचकर वाल्व को गुब्बारे (balloon) की मदद से फुलाया जाता है या वह स्वयं फैल जाता है (self-expanding valve). नया वाल्व पुटाने खटाव वाल्व को किनारे दबाकर तुरंत काम करना शुरू कर देता है. इस पूटी प्रक्रिया में आमतौर पर एक से दो घंटे का समय लगता है. न छाती की हड्डी काटनी पड़ती है, न ही हृदय को टोकना पड़ता है.
TAVI के प्रमुख लाभ
कोई बड़ा चीटा नहीं, जिससे दर्द और संक्रमण का खतटा बेहद कमा, ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में कहीं अधिक तेज ठिकवटी. अधिकांश मरीजों को दो से तीन दिनों में अस्पताल से छुट्टी. कई मटीज एक-दो सप्ताह में सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं. 65 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों तथा मधुमेह, फेफड़ों या गुर्दे की बीमाटी से पीड़ित लोगों के लिए एक सुरक्षित विकल्प.
विश्व स्तर पर सिद्ध तकनीक
उल्लेखनीय है कि दुनिया में पहली TAVI प्रक्रिया वर्ष 2002 में फ्रांस में की गई थी. तब से यह तकनीक निरंतर विकसित हुई है और आज विश्वभर में लाखों मटीज इससे लाभान्वित हो चुके हैं. पहले यह केवल अत्यधिक हाई-रिस्क मटीजों के लिए सीमित थी, लेकिन बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के सफल परिणामों के बाद अब इसे उपयुक्त मटीजों में व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है. डॉ. स्वामी ने कहा कि अब यह विश्वस्तटीय उपचार बीकानेर और आसपास के क्षेत्र के मटीजों को अपने ही शहर में उपलब्ध है, जिससे उन्हें बड़े महानगटों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती.
प्रक्रिया के बाद देखभाल
TAVI के बाद मटीज के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। दीर्घकालिक सफलता के लिए डॉ. स्वामी ने कुछ जरूटी सुझाव दिए : डॉक्टर द्वारा बताई गई रक्त पतला करने वाली और अन्य दवाएं नियमित रूप से लें. कुछ सप्ताह तक भाटी वजन उठाने या कटिन व्यायाम से बचें. कम नमक वाला संतुलित आहार लें. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहें. वाल्व की कार्यप्रणाली जांचने के लिए समय-समय पर फॉलो-अप अवश्य क रवाएं. उन्होंने कहा कि हर मरीज के लिए उपचार का निर्णय विस्तृत जांच और विशेषज्ञ परामर्श के बाद ही लिया जाता है, ताकि मटीज को सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल सके.
